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इसके बाद कभी नहीं कहोगे जॉब करें या बिजनेस, डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने बताई वजह

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दोस्तों भारत एक युवाओं वाला देश है जानकारी के अनुसार यह 26 प्रतिशत युवक है और आज हर युवा की एक ही परेशानी और एक ही सवाल, जॉब करना सही है या मैं खुद का कुछ करू जैसे की बिजनेस, दोस्तों इस आर्टिकल में हम उन सब बारीकियों के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे।

जिन की वजह से युवाओं के मन में ऐसे सवाल आते है। आखिर ऐसा क्यों विशेषज्ञों का इस बारे में क्या कहना है यह हम किसी मोटिवेशन की बात नहीं कर रहे हैं। यह हम इस समस्या को बारीकी से समझ कर हल, करने की कोशिश करेंगे।

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युवाओं के मन में कहा से आया ये सवाल

मैं जॉब करु या बिजनेस आज की युवा पीड़ी इस मानसिक समस्या से ग्रस्त हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह सवाल युवकों के मन में आ क्यों रहा है वह अपने भविष्य के प्रति सचेत क्यों नही हैं। दोस्तों इस का कारण है हम आज भी समय से पीछे चल रहे है। इस में हमारे एजुकेशन सिस्टम की भी कमी है, अब कुछ लोग कहेंगे एजुकेशन को क्यों बीच में ला रहे हो उस से क्या परेशानी है। उन लोगों से मेरा एक ही सवाल है हमारा एजुकेशन सिस्टम किसने बनाया, बेहद सोचने के बाद आप कहेंगे अंगेजों ने जो की काफी समय पहले देश से जा चुके है।

उस समय हमारा देश उन का गुलाम था और वह हम से गुलामी करवाना चाहते थे। तो वह हमें ऐसा एजुकेशन सिस्टम क्यो बना के देगे जिस से हम उन से आगे निकले। वह हमें उस तरीके की एजुकेशन देना चाहते थे जिस से हम उन की नौकरी करें। और हमेशा गुलाम बने रहें, आज सब कुछ बदल चुका है पर क्या एजुकेशन के परीके में ज्यादा कुछ बदला, हम स्मार्ट होते जा हरे है (टेक्नोलॉजी के स्तर पर) हमें एजुकेशन पर ध्यान देना है बाकी सब कुछ धीरे धीरे ठीक हो जाएगा। हमें एजुकेशन में वित्तीय ज्ञान, जीवन शैली जीने का तरीका आदि विषयों को भी शामिल करना होगा। जिस से युवाओं के मन से यह सवाल चला जाएगा अपने जीवन का फैसला उन्हें खुद करना हैं।

क्या है विशेषज्ञों का मानना

दोस्तों में आप से अपना किस्सा सांझा करना चहता हूं। आज सुबह में मोबाइल पर एक वीडियो देख रहा था। जिस में एजुकेशन जगत के जाने माने टीचर डॉ विकास दिव्यकीर्ति एक कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित कर रहे थे। मैं उन्हें बढ़े ध्यान से सुन रहा था, वह बच्चों को एक केसस्टडी बता रहे थे जब वह विदेश की एक यूनिवर्सिटी में लैक्चर देने गए थे।

दिव्यकीर्ति सर, ने बताया कि उन्होंने वहा के कुछ भारतीय छात्रों से पूछा की यहां से जाने के बाद आप को कितने का पैकेज मिलेगा, पहले तो छात्र थोड़ा सा सहम गए क्योंकि सर ने पहले ही कठिन सवाल पूछ लिया था। जिस के बाद एक छात्र ने बताया कि पहले 3 साल काम कर के कर्जा उतारेगे जो की हमारी एजुकेशन में खर्च हुआ है उस के बाद कुछ सोचेंगे।

सर, ने बताया मैं न्यूयॉर्क (अमेरिका) में थे। वहां से उन्होंने एयरपोर्ट के लिए टैक्सी ली, उस टैक्सी का ड्राइवर ताजिकिस्तान से था। सर ने बताया कि वह जब भी सफर में होते है तो वह हर टैक्सी ड्राइवर से बात करना पसंद करते है। सर, ने बताया उस का नाम गाईलाटी जो की 23 साल का था, दोस्तों उस  इंग्लिश कम आती थी। तो बात इशारों मे हुई। सर ने उससे आगे पूछा कितना कमा लेते हो टैक्सी चलाकर ने बताया कि वह 12 से 14 हजार डौलर हर महीना कमा लेता है जो की भारतीया रुपयों में 10 से 12 लाख होते है, सर ने आगे पूछा यह सेविंग है या रेवेन्यू है। दोस्तों उस ने जवाब दिया यह मेरी सेविंग है।

तो सर, ने उसे आगे समझाया कि अगर तुम जॉब करोगे तो हर साल तुम्हारी इनकम बढ़ेगी यह तुम हर महीने एक जैसी इनकम कमा रहे हो, जिस के बाद उस टैक्सी ड्राइवर ने जवाब दिया मैंने 2 टैक्सी और खरीद ली है जो की उन्हें 2 ड्राइवर चला रहे हैं। सबसे बड़ी बात वो साथ में पढ़ाई भी कर रहा था।

दोस्तों यह मानसिकता है कि अगर हम नौकरी करेंगे तो ही हमारी लाइफ सिक्योर होगी नही तो हम बेकार है। यह मानसिकता भारत की है। आज हमारे देश की सरकार स्टार्टअप करने पर जोड़ दे रही है, आप को एक बात समझ लेनी चाहिए स्टार्टअप करने का मतलब करोड़ों का बिजनेस खड़ा करना नही है बल्कि कुछ करना है आज जो भी अपना काम कर रहे है वो स्टार्टअप है।

एक बात हमेशा ध्यान रखे स्टार्टअप वो है जिस में सभी का फायदा हो अगर सिर्फ आप का ही फायदा हो रहा है तो इस कि बेहद संभावना है की आप का स्टार्टअप लंगे समय तक नही चलेंगा आप को सभी को साथ में लेकर चलना होगा फिर चाहे वह आप के कस्टमर हो या एंप्लॉए, आप को सभी को इंपॉर्टेंस देनी होगी।  

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