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Bhai Dooj 2023: क्यों मनाया जाता है भाई दूज, जाने शुभ मुहूर्त

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इस वर्ष लोगों में भाई दूज का त्योहार मनाने को लेकर भ्रम की स्थिति है। जहां कुछ लोगों ने भाई दूज 14 नवंबर को ही मना ली है वहीं अधिकांश लोग 15 नवंबर को मना रहे है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 15 नवंबर को भाई के माथे पर तिलक लगाने के दो शुभ मुहूर्त है। पहला मुहूर्त 15 नवंबर को प्रात: 6 बजकर 44 मिनट से लेकर सुबह 9बजकर 24 मिनट तक है जबकि दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजे तक का है।

भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस तिथि का संबंध यमराज से होने के कारण इस त्योहार को यम द्वितीया भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन बहने अपने भाई को तिलक करती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती है। कहा जाता है कि इस दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है।

कैसे हुई भाई दूज की शुरूआत

स्कंदपुराण के अनुसार भाई दूज के पर्व की शुरूआत यमुना जी से हुई थी। यमराज और यमुना दोनों सूर्य देव की संतान हैं। एक बार यमराज को अपनी बहन यमुना की बहुत याद आ रही थी इसलिए अचानक वह अपनी बहन से मिलने उनके घर पहुंच गए।

भाई यमराज को देखकर यमुना बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने उनके मस्तक पर तिलक लगाकर मिठाई खिलाई और भेंट स्वरूप उन्हें नारियल देकर उनका स्वागत किया। यमुना जी से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना जी से वरदान मांगने को कहा।

इस पर यमुना जी ने यमराज से प्रत्येक वर्ष इस दिन मिलने आने की इच्छा प्रकट की। इस पर यमराज ने कहा कि मै ही नहीं बल्कि प्रत्येक भाई आज के दिन यदि अपनी बहन के घर जाकर अपने माथे पर तिलक लगवाता है उसकी आकाल मृत्यु नहीं होगी और उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

जिस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के पास पहुंचे थे वह दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। उसी दिन से इस दिन को भाई दूज या यम द्वितीया कहा जाता है।

कब है भाई दूज

पंडित पियूष अवतार शर्मा के अनुसार इस वर्ष द्वितीया तिथी की शुरूआत 14 नवंबर को दोपहर से शुरू होकर 15 नवंबर को दोपहर तक है। कई लोग 14 नवंबर को भी भाई दूज मना रहे है। लेकिन हिन्दू पंचाग के अनुसार किसी भी दिन को सूर्य उदय के अनुसार मनाया जाता है पंचाग के अनुसार भाई दूज 15 नवंबर को मनाना चाहिए।

भाई दूज का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष भाई दूज पर भाई के माथे पर तिलक लगाने के दो शुभ मुहूर्त है। पहला मुहूर्त 15 नवंबर को प्रात: 6 बजकर 44 मिनट से सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक है जबकि दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजे तक है।

कैसे करें भाई दूज की पूजा

पंडित पियूष अवतार शर्मा के अनुसार भाई दूज के दिन भाई को प्रात:काल वृह्म मुहूर्त में उठकर चन्द्रमा के दर्शन करने चाहिए उसके बाद दैनिक क्रिया के बाद शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए। वहीं बहनों को प्रात: काल उठकर स्नान आदि से निवृत होने के बाद भाई के तिलक और आरती की थाल सजानी चाहिए।

थाल में सिंदूर, चंदन, चावल, फूल एवं मिठाई आदि सामग्री होनी चाहिए। तिलक करने से पूर्व बहन को चावल के मिश्रण से चौक बनाना चाहिए। इसी चौक पर भाई को बैठाकर शुभ मुहूर्त में भाई का तिलक करना चाहिए तथा भाई को नारियल देना चाहिए।

तिलक के बाद भाई की आरती भी उतारनी चाहिए। आरती के बाद भाई को अपनी बहन को कोई उपहार देना चाहिए और सदैव उनकी रक्षा का वचन देना चाहिए। कई स्थानों पर यमराज को प्रसन्न करने के लिए बहने व्रत भी रखती हैं। कई स्थानों पर यमराज के साथ चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है।

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